इस सभा का गठन 6 मार्च 2017 में समाज एवं मेहनतकश लोगों की सहमति से किया गया। संगठन का उद्देश्य प्रवासी उत्तराखण्डवासियों को एक मंच पर लाकर सांस्कृतिक, सामाजिक और सेवा-आधारित गतिविधियों के माध्यम से समुदाय को सुदृढ़ बनाना है। संस्थापक सदस्यों और सक्रिय कार्यकर्ताओं की मेहनत व समर्पण ने मंच को स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
प्रारम्भिक वर्षों में संस्था ने माता भगवती के जागरण, रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान और चिकित्सा शिविर जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया। इन अभियानों ने न केवल लोगों की सेवा की बल्कि उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति और परम्पराओं को भी बढ़ावा दिया। COVID-19 महामारी के दौरान मंच ने राहत सामग्री और राशन वितरण के माध्यम से समाज की मदद की।
फरवरी 2023 में नई कार्यकारिणी निर्वाचित की गई, जिसने आते ही कई गतिविधियाँ और कार्यक्रम चलाए तथा समुदाय की भागीदारी बढ़ाने का कार्य किया। मंच का विश्वास है कि संस्कृति, शिक्षा और सेवा के माध्यम से ही समाज को सशक्त बनाया जा सकता है।



मकरेणी कौथिक महोत्सव 2026 एक भव्य सांस्कृतिक आयोजन रहा, जिसमें उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, परंपराओं और विरासत की सुंदर झलक प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम में लोकनृत्य, लोकगीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया।
इस महोत्सव में स्थानीय नागरिकों, युवाओं, महिलाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विभिन्न सांस्कृतिक झांकियों और प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्तराखंडी जीवनशैली और सामाजिक मूल्यों को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया।
मकरेणी कौथिक महोत्सव 2026 ने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने, सामाजिक एकता को मजबूत करने और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का सशक्त संदेश दिया।
1 अक्टूबर 2025 को आयोजित मां भगवती जागरण एक अत्यंत श्रद्धापूर्ण और आध्यात्मिक आयोजन रहा, जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्तिमय वातावरण में माता रानी की आराधना की। भजन, कीर्तन और जागरण की प्रस्तुतियों ने सभी को भावविभोर कर दिया।
श्रद्धालुओं ने पूरी रात जागकर माता के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। दीपों, फूलों और साज-सज्जा से सुसज्जित आयोजन स्थल ने वातावरण को दिव्य और शांतिमय बना दिया।
इस जागरण ने समाज में धार्मिक आस्था, आपसी सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया तथा सभी श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराया।





